Homeblogथके मन को शक्ति देने वाले श्रीमद्भगवद् गीता के 10 अमर उपदेश.

थके मन को शक्ति देने वाले श्रीमद्भगवद् गीता के 10 अमर उपदेश.

थके मन को शक्ति देने वाले श्रीमद्भगवद् गीता के 10 अमर उपदेश.

  1. कर्मणि एव अधिकारः (कर्म करो, फल की चिंता मत
    करो)

    गीता का प्रमुख उपदेश है कि प्रत्येक मनुष्य को केवल अपने कर्म का
    अधिकार है
    , न कि उसके फलों का। यह हमें कर्म करने के लिए
    प्रेरित करता है बिना फल की चिंता किए। इससे चिंता
    , तनाव और असफलता का भय कम होता है और मन शुद्ध होकर
    कर्म में लगा रहता है।
  2. आत्मा अमर है (अमर आत्मा का बोध)
    गीता कहती है कि आत्मा न तो कभी मरती है और न कभी जन्म लेती है, यह केवल शरीर का परिवर्तन है। यह ज्ञान निराशा और भय
    को खत्म करता है
    , क्योंकि शरीर
    नश्वर है पर आत्मा शाश्वत है।
  3. धैर्य और समत्व (सुख दुःख के समय सम भाव रखना)
    जीवन के सुख-दुख को समान भाव से स्वीकार करना गीता का उपदेश है। इससे
    मन स्थिर रहता है और हर परिस्थिति में शांतिपूर्ण ढंग से निर्णय ले सकता है।
  4. क्रोध और मोह से बचें (क्रोध मन को भ्रमित करता है)
    अर्जुन को भगवान कृष्ण कहते हैं कि क्रोध बुद्धि नष्ट करता है जो
    मनुष्य के सर्वाधिक कष्ट का कारण है। इसलिए क्रोध और मोह से मुक्ति आवश्यक
    है।
  5. स्वधर्म का पालन (अपने कर्तव्य का पालन करें)
    गीता कहती है कि अपने धर्म और कर्तव्य का पालन करना सबसे बड़ा धर्म है।
    व्यक्ति को अपने स्वधर्म से विचलित नहीं होना चाहिए चाहे परिस्थिति कैसी भी
    हो।
  6. संकल्प और विश्वास (अपने लक्ष्य में दृढ़ रहें)
    गीता में कहा गया है कि जो व्यक्ति अपने उचित लक्ष्य और कर्मों पर
    विश्वास रखता है
    , वह कभी असफल
    नहीं होता। आत्म-विश्वास जीवन में सफलता का मूल मंत्र है।
  7. सर्वधर्मान् परित्यज (सब धर्मों को त्याग कर परमेश्वर की शरण में जाना)
    गीता यह भी सिखाती है कि मनुष्य को सभी प्रकार के बाहरी बंधनों और
    आडम्बरों से ऊपर उठकर केवल परमात्मा की शरण में आ जाना चाहिए।
  8. योग और ध्यान (मन को नियंत्रित करें)
    योग और ध्यान के माध्यम से मन को स्थिर करने तथा इच्छाओं को नियंत्रित
    करने का उपदेश गीता देती है। इससे व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।
  9. भक्ति भाव (प्रेमभाव से भगवान को स्मरण करना)
    भगवान कृष्ण कहते हैं कि जो लोग प्रेम-भाव से भगवान की भक्ति करते रहते
    हैं
    , उन्हें परम ज्ञान और आंतरिक शांति प्राप्त होती है।
  10. वर्विकल्प बुद्धि (बुद्धि को स्थिर कर भगवान में लगाव करना)
    जो मनुष्य बिना किसी संदेह के भगवान की याद में लीन रहता है और
    सिद्धांतों को समझकर योग करता है
    , वह उसके जीवन का
    अभिन्न भाग बन जाता है।

ये उपदेश जीवन के हर संकट में एक नई उम्मीद की किरण बनकर
हमें सही दिशा देते हैं। इनके माध्यम से व्यक्ति अपने मन की थकान दूर कर आत्मबल
बढ़ा सकता है तथा जीवन में स्थिरता और शांति प्राप्त कर सकता है। गीता हमें सिखाती
है कि कठिनाइयों में भी धैर्य रखो
, कर्म में लीन रहो और
भगवान पर पूर्ण भरोसा करो
, क्योंकि यही जीवन की
सच्ची सफलता का रहस्य है.

 

 

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