
विकसित भारत-G-RAMJI विधेयक, 2025: एक व्यापक विश्लेषण
G-RAMJI (ग्रामीण रोज़गार-आधारित मुद्रा और आजीविका पहल), जिसका नाम अब बदलकर लाइवलीहुड फर्स्ट और ग्रामीण रोज़गार-आधारित मुद्रा पहल कर दिया गया है, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का एक नया रूप है, जिसका लक्ष्य 2047 तक ग्रामीण भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलना है। यह कोई नई राजनीतिक रणनीति नहीं है, बल्कि एक बेहतर तरीका है जो देश के विकास के लिए बहुत प्रभावी साबित होगा। यह पिछले MGNREGA का एक अपग्रेडेड वर्जन है, और इसमें कोई शक नहीं है।
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आवश्यकता
2005 में शुरू की गई यह योजना शुरू में रोज़ी-रोटी और रोज़गार की गारंटी देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था, लेकिन पिछले 10 सालों में इसमें कई कमियां सामने आई हैं।
1. इनमें शामिल हैं: भ्रष्टाचार और बिचौलियों के साथ मिलकर नकली मस्टर रोल बनाने और पेमेंट करने से जुड़े मामले;
2. कृषि संकट, जिससे फसल कटाई के मौसम में लेबर मार्केट में असंतुलन और किसानों के लिए लागत में बढ़ोतरी हुई;
3. गड्ढे खोदने जैसी गतिविधियों से कोई स्थायी आर्थिक संपत्ति न बनना;
4. और केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड बंटवारे को लेकर विवादों के कारण पेमेंट में देरी,
5. जिससे मज़दूरों को अपनी मज़दूरी के लिए हफ़्तों इंतज़ार करना पड़ता है।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए, MGNREGA के तहत “विकास भारत” (विकसित भारत) G-RAMJI नाम की एक नई पहल शुरू की गई है।
. विधेयक के पांच तत्व (Five Pillars)
(A) रोजगार गारंटी का विस्तार और लचीलापन
यह विधेयक प्रत्येक रोजगार प्राप्त करने बाले परिवार को 125 दिनों के काम की गारंटी देता है। यह अतिरिक्त 25 दिन विशेष रूप से ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ाने के लिए जोड़े गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह 125 दिन केवल “शारीरिक श्रम” तक सीमित नहीं हैं; इसमें अर्ध-कुशल (Semi-skilled) कार्यों को भी शामिल किया गया है।
(B) एग्री-पॉज (Agri-Pause) और कृषि समन्वय
भारत एक कृषि प्रधान देश है। मनरेगा और कृषि कार्यों के बीच हमेशा टकराव रहा है। G-RAMJI विधेयक ने इसे “एग्री-पॉज” के माध्यम से हल किया है:
- अनिवार्य अवकाश: बुवाई और कटाई के दौरान 60 दिनों के लिए सरकारी निर्माण कार्य बंद रहेंगे।
- मजदूरों की उपलब्धता: इससे कृषि क्षेत्र को पर्याप्त श्रमिक मिलेंगे और खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- पूरक आय: मजदूर साल के बाकी समय में 125 दिन का लक्ष्य पूरा कर सकेंगे, जिससे उनकी वार्षिक आय में 30-40% की वृद्धि होगी।
(C) नई फंडिंग संरचना (60:40 मॉडल)
फंडिंग का नया मॉडल राज्यों को केवल ‘कार्यान्वयन एजेंसी’ से बदलकर ‘साझेदार’ के रूप मे बनाता है।
- वित्तीय उत्तरदायित्व: जब राज्यों को 40% खर्च उठाना होगा, तो वे भ्रष्टाचार रोकने के लिए अधिक सतर्क रहेंगे।
- क्षेत्रीय असमानता का अंत: पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात रखा गया है ताकि उनकी भौगोलिक चुनौतियों को स्वीकार किया जा सके।
(D) डिजिटल और तकनीकी क्रांति (Tech-Stack)
G-RAMJI विधेयक पूरी तरह से ‘डिजिटल-फर्स्ट’ संरचना पर आधारित है:
- AI-आधारित निगरानी: कार्यस्थलों पर स्वचालित कैमरे और ड्रोन का उपयोग करके काम की प्रगति मापी जाएगी।
- ब्लॉकचेन रिकॉर्ड: सभी लेन-देन और मस्टर रोल ब्लॉकचेन पर होंगे, जिन्हें बदला नहीं जा सकेगा।
- वन-नेशन-वन-पेमेंट: ‘आधार-पे’ के माध्यम से सीधे बैंक खाते में तत्काल साप्ताहिक भुगतान।
(E) परिसंपत्ति सृजन (Asset Creation)
ग-रामजी विधेयक का मुख्य मंत्र है: “काम वही, जो संपत्ति बनाए”। अब केवल कच्ची सड़कें नहीं बनेंगी, बल्कि ऐसी संपत्तियां बनेंगी जो भविष्य में राजस्व (Revenue) पैदा करें, जैसे सामुदायिक सौर पार्क, आधुनिक शीत भंडारण (Cold Storage) और जल शोधन संयंत्र।
3. ग्रामीण बुनियादी ढांचे का पुनर्गठन
G-RAMJI के तहत परियोजनाओं को चार श्रेणियों में बांटा गया है:
- जल जीवन मिशन का समर्थन: जल संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर चेक डैम और अमृत सरोवर जलासाय योजना बनाना।
- डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर: गांवों में फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाने और डिजिटल केंद्रों के निर्माण के लिए श्रम का उपयोग।
- जलवायु अनुकूलन: तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव वृक्षारोपण और बंजर भूमि पर बन रोपण कर जंगल के प्रतिसत को बढ़ाना।
- लॉजिस्टिक्स: गांवों को मुख्य राजमार्गों से जोड़ने वाली पक्की सड़कों का निर्माण।
4. सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण
ग्रामीण गरीबी में कमी
125 दिनों के रोजगार और न्यूनतम मजदूरी को मुद्रास्फीति (Inflation) से जोड़ने के प्रावधान के कारण ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी दर में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। यह शहरी क्षेत्रों की ओर होने वाले अनचाहे पलायन (Distress Migration) को भी रोकेगा।
महिला सशक्तिकरण
विधेयक में 50% कार्यों के लिए महिलाओं को प्राथमिकता देने और कार्यस्थल पर छोटे संतान को देखभाल (Creche) सुविधाओं को अनिवार्य करने का प्रावधान है। यह ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाएगा।
वित्तीय समावेश
साप्ताहिक भुगतान प्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों और ‘डिजिटल पेमेंट’ के उपयोग को बढ़ावा देगी, जिससे ग्रामीण ऋण बाजार (Rural Credit Market) मजबूत होगा।
5. कार्यान्वयन में आनेबाली चुनौतियां
विधेयक जितना महत्वाकांक्षी है, इसकी राह में उतनी ही चुनौतियां भी हैं:
- राज्यों की वित्तीय स्थिति: कई राज्य पहले से ही कर्ज में डूबे हुए हैं। उनके लिए 40% का बोझ उठाना मुश्किल हो सकता है, जिससे योजना के धीमा होने का खतरा है।
- तकनीकी साक्षरता: ग्रामीण स्तर के अधिकारियों (पंचायत सचिवों) को AI और ब्लॉकचेन आधारित प्रणालियों का प्रशिक्षण देना एक बड़ा कार्य है।
- इंटरनेट कनेक्टिविटी: भारत के कई दूरदराज के गांवों में अभी भी 5G या स्थिर इंटरनेट नहीं है, जो रियल-टाइम मॉनिटरिंग में बाधा बन सकता है।
6. भविष्य का प्रारूप (Way Forward)
विकसित भारत-G-RAMJI विधेयक, 2025 की सफलता तीन बातों पर निर्भर करेगी:
- सहकारी संघवाद: केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय।
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): स्थानीय समुदायों द्वारा कार्यों की जांच।
- कौशल विकास: श्रमिकों को शारीरिक श्रम से हटाकर तकनीकी कौशल की ओर ले जाना।
7. संक्षेप में
G-RAMJI विधेयक केवल एक नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण आत्मनिर्भरता का एक नया घोषणापत्र है। यदि इसे सही भावना के साथ लागू किया गया, तो यह भारत के 6.5 लाख गांवों की तस्वीर बदल देगा। यह “मजदूरी” को “सम्मान” और “देश निर्माण” के साथ जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक कानून है।
तुलनात्मक चार्ट: मनरेगा vs G-RAMJI
| मानदंड | MGNREGA (पुराना) | G-RAMJI (2025) |
| लक्ष्य | गरीबी उन्मूलन | विकसित भारत @ 2047 |
| रोजगार अवधि | 100 दिन | 125 दिन + 60 दिन एग्री-पॉज |
| तकनीक | न्यूनतम/मैनुअल | AI, ड्रोन और ब्लॉकचेन |
| संपत्ति | अस्थायी (Kucha) | स्थायी और राजस्व उत्पन्न करने वाली |
| मजदूरी भुगतान | 15-30 दिन | 7 दिन (साप्ताहिक) |
| फंडिंग | 100% केंद्र (मजदूरी) | 60% केंद्र : 40% राज्य |

