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स्विगी ऐप से डिप्टी कलेक्टर बने सूरज यादव की कहानी: संघर्ष, मेहनत और जुनून की प्रेरणा

 

स्विगी ऐप से डिप्टी कलेक्टर बने
सूरज यादव की कहानी: संघर्ष
, मेहनत और जुनून की प्रेरणा

 

स्विगी से
डिप्टी कलेक्टर बनने की प्रेरणादायक कहानी

जीवन
में संघर्ष हर किसी के हिस्से आता है
,
लेकिन असली बात तो तब होती है जब
कठिनाइयों के बावजूद कोई अपनी मंजिल पाने का जज्बा बनाए रखता है। ऐसी ही कहानी है
 गिरिडीह (झारखंड) के छोटे से गांव कपिलो के रहने वाले सूरज यादव की।

सूरज
का परिवार बहुत ही सामान्य था। उनके पिता राजमिस्त्री का काम करते थे। आर्थिक
स्थिति इतनी कमजोर थी कि पढ़ाई जारी रखना बहुत कठिन हो गया। लेकिन सूरज ने हार
नहीं मानी। उन्होंने मन बना लिया कि कठिनाइयों से डरे बिना अपने सपनों को पूरा
करेंगे।

संघर्ष
की शुरुआत

खर्च
चलाने और पढ़ाई पूरी करने के लिए सूरज ने
 स्विगी डिलीवरी बॉय की नौकरी शुरू की।

  • दिनभर पढ़ाई करना
  • रात में ऑर्डर डिलीवर करना

यही
उनकी दिनचर्या बन गई। धूप में हो
,
बारिश हो या ठंडी रातें—सूरज ने कभी हार
नहीं मानी।

परिवार का
हौसला

इस
संघर्ष में सूरज की
 बहन और पत्नी ने हर कदम पर उनका साथ दिया।

  • बहन ने घर की जिम्मेदारी संभाली
  • पत्नी ने उनका मनोबल बढ़ाया

इस
परिवार का समर्थन सूरज को मजबूत बनाता रहा।

मेहनत और लगन
का फल

सूरज
जानते थे कि मेहनत के बिना सफलता नहीं मिलती।

  • उनसे बचपन से ही पढ़ने की आदत थी
  • मोबाइल पर नोट्स बनाते
  • रास्ते में मोटिवेशनल पॉडकास्ट
    सुनते

कई
बार असफलता का सामना किया
,
लेकिन हार नहीं मानी।

JPSC में
सफलता

लगातार
कोशिश के चलते सूरज यादव ने
 JPSC परीक्षा
पास की
 और डिप्टी कलेक्टर बने। यह कहानी उन लाखों युवाओं को प्रेरणा देती है जो गरीबी
या कठिनाइयों के कारण अपने सपनों से दूर हो जाते हैं।

युवाओं के लिए
सीख

सूरज
की कहानी से हमें यह सीख मिलती है:

  • संघर्ष से सफलता – मेहनत का रास्ता हमेशा मंजिल तक ले जाता है।
  • लगातार प्रयास – हार मानने वाला कभी विजेता नहीं बन सकता।
  • प्रेरणादायक उदाहरण – हालात चाहे जैसे भी हो, जुनून और मेहनत से असंभव को संभव किया जा सकता है।

सूरज
यादव की कहानी हर उस युवा के लिए मिसाल है जिनके पास सीमित संसाधन हैं
, लेकिन जुनून जब ऊपर आ जाता है तो सब संभव है।

अक्सर पूछे
जाने वाले सवाल – सूरज यादव की सफलता की कहानी

1.
सूरज यादव कौन हैं?

सूरज
यादव झारखंड के गिरिडीह जिले के कपिलो गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने सामान्य
परिवार से निकलकर
JPSC परीक्षा पास की और डिप्टी कलेक्टर बने।

2. सूरज
ने पढ़ाई का खर्च कैसे निकाला
?

आर्थिक
तंगी के कारण
, उन्होंने स्विगी डिलीवरी बॉय की नौकरी की। दिन में काम कर
खर्च को संभाला और अपनी पढ़ाई की।

3. क्या
सूरज यादव को प्रयास
 
असफलता का
सामना करना पड़ा था
?

हां, कई बार असफलता भी मिली,
पर हिम्मत नहीं हारी। लगातार मेहनत कर
आखिरकार वह सफलता हासिल कर सके।

4. उनके
सफलता से युवाओं को क्या सीख मिलती है
?

उनकी
कहानी यह सिखाती है कि संघर्ष और मेहनत से ही सपने पूरे होते हैं
, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।

5. क्यों
सूरज यादव की कहानी प्रेरणादायक है
?

क्योंकि
उन्होंने गरीबी और संसाधनों की कमी के बावजूद अपने लक्ष्य को कभी पीछे नहीं छोड़ा।
उनकी यात्रा हर युवा के लिए प्रेरणा है।

 

 यात्रा हर युवा के लिए प्रेरणा है।

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