Homehealthक्या डेयरी उत्पाद खाने से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा?

क्या डेयरी उत्पाद खाने से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा?

क्या डेयरी उत्पाद खाने से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा?

पिछले कुछ वर्षों में यह सवाल लोगों के मन में बार‍-बार
उठता रहा है कि क्या दूध
, दही, पनीर, मक्खन और घी जैसे डेयरी उत्पाद हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं, खासतौर पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के संदर्भ में। वैज्ञानिक अध्ययनों के
मिले-जुले परिणामों ने इस विषय को और जटिल बना दिया है। आइए
, इस पर क्रमवार चर्चा करें।

1. डेयरी उत्पाद क्या हैं?

 डेयरी प्रोडक्ट्स  का मतलब वहीं दूध से बनने वाली चीज़ें – गाय, भैंस, बकरी वगैरह का दूध, और उससे बना दूध, दही, पनीर, मक्खन, घी, छाछ…इतना सारा। हमारे घरों में तो ये रोज़मर्रा की चीज़ है। ऊपर से कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन B12 – पोषक तत्वों की पूरी फौज मिलती है इससे, बोलो और क्या चाहिए?

अब, विज्ञान की बात करें तो, दुनियाभर के साइंटिस्ट्स ने इसपर खूब माथापच्ची की है – यानि क्या दूध वगैरह का ज़्यादा सेवन कैंसर का रिस्क बढ़ाता है या नहीं?

2. वैज्ञानिक अनुसंधान क्या कहते हैं?

प्रोस्टेट कैंसर की बात करें तो, कुछ रिसर्चर्स बोलते हैं कि अगर कोई बहुत ज़्यादा दूध या चीज़ पीता-खाता है तो पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा थोड़ा सा बढ़ सकता है। शायद दूध में जो IGF-1 जैसा कोई हार्मोन-टाइप फैक्टर होता है, वो सेल्स की ग्रोथ पर असर डालता है – कुछ-कुछ ऐसा समझो।
फिर स्तन कैंसर की बात – 2019 में एक इंटरनेशनल जर्नल में छपी स्टडी ने देखा कि जो महिलाएं बहुत दूध पीती हैं, उनमें ब्रैस्ट कैंसर का रिस्क थोड़ा ज़्यादा मिला।
 कोलन कैंसर के मामले में उल्टा है। वहाँ पर कैल्शियम और विटामिन D जो डेयरी प्रोडक्ट्स में होते हैं, वो कोलन या रेक्टल कैंसर से प्रोटेक्ट भी कर सकते हैं।
कुल मिलाकर – ये डेयरी और कैंसर का रिश्ता बड़ा कन्फ्यूजिंग है, सीधा-सीधा कुछ भी नहीं। बैलेंस रखो, ओवरडोज़ से बचिए । 

3. डेयरी में संभावित हानिकारक तत्व

डेयरी प्रोडक्ट्स में जो ये हार्मोन घुसा-घुसाकर बेचे जाते हैं ना, rBGH वगैरह—ये मज़ाक नहीं है, सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है। दूध पी रहे हो, साथ में बोनस हार्मोन भी मिल रहा है—वाह भई, क्या डील है!

अब सैचुरेटेड फैट की बात करें—मक्खन, घी, मलाई—यार, मुँह में पानी आ जाता है, मानता हूँ, लेकिन दिल-ओ-दिमाग दोनों बिगाड़ सकते हैं। हार्ट प्रॉब्लम्स, ऊपर से कैंसर का खतरा—सब इस मलाईदार मोहब्बत में मौजूद है।

और हाँ, कैलोरी के मामले में डेयरी बिल्कुल चीटिंग करती है। अगर लिमिट क्रॉस कर दी तो वजन तो बढ़ेगा ही, फिर मोटापा—और मोटापे के साथ कैंसर वाली बीमारियाँ फ्री में मिलेंगी। तो भाई, सोच समझकर खाओ, नहीं तो दूध के चक्कर में डॉक्टर के चक्कर काटते रहोगे! 

4. डेयरी के संभावित लाभ

डेयरी प्रोडक्ट को पूरी तरह विलेन मत बनने दीजिए । इसमें भी काफी फायदे छुपे हैं, जैसे – हड्डियाँ और दाँत मजबूत रहते हैं, क्योंकि कैल्शियम ठूंस-ठूंस के मिलता है। प्रोटीन और B12 भी मिल जाता है, जो अक्सर लोगों को सब्ज़ियों से कम ही मिलता है। दही वगैरह तो पेट के लिए मस्त है – प्रोबायोटिक, समझे? और हाँ, ब्लड प्रेशर भी थोड़ा कंट्रोल में रहता है। असली मुद्दा ये है कि कितना और कौन सा डेयरी ले रहे हो। अति हर चीज़ की बुरी, भई!

5. कैंसर के अलग-अलग टाइप्स पर डेयरी का क्या असर पड़ता है?

प्रोस्टेट कैंसर – ज्यादा दूध पी गए तो रिस्क बढ़ सकता है… हां, थोड़ा सा।  

स्तन कैंसर – कुछ स्टडीज़ कहती हैं रिस्क बढ़ता है, कुछ बोलती हैं – कुछ खास फर्क नहीं पड़ता।  

कोलन कैंसर – उल्टा, यहां डेयरी थोड़ी मदद कर देती है।  

पेट कैंसर – भाई, कोई ठोस सबूत नहीं मिले अब तक।  

लिवर कैंसर – सीधा-सीधा कोई कनेक्शन नहीं मिला।

6. एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

WHO, AICR, IDA – ये बड़े-बड़े नाम क्या बोलते हैं?  

साफ-साफ, डेयरी लिमिट में खाओ, कोई दिक्कत नहीं।  

लेकिन वही चीज़-पिज़्ज़ा, आइसक्रीम वगैरह – इनका ओवरडोज़ मत करो।  

लो-फैट मिल्क, दही, पनीर – ये बेस्ट ऑप्शन हैं।  

शुद्ध शाकाहारी? तो सोया, बादाम, ओट्स वाला दूध भी ट्राय कर सकते हो।

7. भारत में क्या सीन है?

यहां तो दूध हर गली-मोहल्ले का बेसिक है, लेकिन एक बड़ी टेंशन है – मिलावट!  

कई बार दूध में केमिकल या डिटर्जेंट घुसे रहते हैं, और ये लम्बे टाइम तक पिया तो कैंसर जैसे रोगों का खतरा सच में बढ़ सकता है।  

इसलिए सीधा-साफ सलाह – दूध या डेयरी लेनी है तो भरोसेमंद जगह से लो, वरना फायदा की जगह नुकसान ही मिलेगा।

8. डेयरी बनाम प्लांट-बेस्ड विकल्प

आजकल तो प्लांट-बेस्ड दूध का पूरा जलवा है—सोया वाला, बादाम वाला, ओट वाला… गिनना भी मुश्किल हो गया है, भाई! अच्छी बात ये है कि इनमें न कोलेस्ट्रॉल की टेंशन, न लैक्टोज की झंझट, पेट भी खुश। बस, प्रोटीन और कैल्शियम में असली दूध से थोड़े फिसड्डी रह जाते हैं। हर चीज़ में कुछ न कुछ कमी तो रहती ही है, परफेक्ट कौन है यहाँ?

9. सुरक्षित सेवन के लिए सुझाव

रोज़ एक-दो कप लो-फैट दूध या दही काफी है, ज्यादा पीओगे तो पेट बोलेगा ‘बस कर भाई’।

चीज़ और मक्खन – थोड़ा-सा ही रखना, वरना वजन खिसक के सीधा ऊपर जाएगा, फिर मत कहना बताया नहीं था।

हमेशा भरोसेमंद डेयरी से ही खरीदो, वरना मिलावट वाले तो लाइन में लगे हैं।

सिर्फ दूध-दही से ही उम्मीद मत लगा लो, खाना-पिना अच्छा रखो, चलना-फिरना भी जरूरी है, वरना सब बेकार।

अगर फैमिली में कैंसर का कोई लफड़ा है, तो खुद गूगल डॉक्टरी मत करना, सीधा डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से बात कर लो।

10. निष्कर्ष

सीधी बात—डेयरी से पोषक तत्व तो मिलेंगे ही, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन सब कुछ एक्स्ट्रा करोगे, खासकर वो प्रोसेस्ड या हाई-फैट चीज़ें, तो दिक्कत तो आएगी ही। ऐसा नहीं है कि डेयरी से कैंसर गारंटी है, लेकिन ओवरडोज़ और नकली सामान रिस्क बढ़ा सकते हैं। बैलेंस में  चलना चाहिए .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

Join Us WhatsApp