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“जापानी दीर्घायु के रहस्य: 11 साल लंबी जिंदगी देने वाले रीतियां, खानपान और जीवनशैली के खास राज़”

 “जापानी दीर्घायु के रहस्य: 11 साल लंबी जिंदगी देने वाले रीतियां, खानपान और जीवनशैली के खास राज़”

जापानी लोगों की जीवनशैली, आहार और दैनिक रीतियों में ऐसे कई रहस्य छुपे हैं, जो उनकी औसत उम्र को 11 साल तक बढ़ा सकते हैं और उन्हें बुढ़ापे में भी स्वस्थ और ऊर्जावान रखते हैं. इनके कुछ खास रीतियों और बुढ़ापे के लक्षणों की चर्चा नीचे की गई है।

जापानी लोगों की दीर्घायु का रहस्य

जापान दुनिया का ऐसा देश है जहां औसत आयु सबसे अधिक है—यहां पुरुष करीब 80 और महिलाएं लगभग 86 साल तक जीवित रहती हैं, जबकि भारत में औसत आयु 69 साल है. जापान में एक लाख से अधिक लोग 100 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं और उनका स्वास्थ्य भी अनुकरणीय है.

दीर्घायु के 10 जापानी रीतियां

•सूरज की पहली किरण के साथ उठना: जापानी लोग सुबह जल्दी उठते हैं, जिससे विटामिन D मिलता है और शरीर के कार्यकारी तंत्र सक्रिय रहते हैं.

•गहरी सांस लेना और मेडिटेशन: ध्यान और ब्रीदिंग एक्सरसाइज तनाव को नियंत्रित कर मानसिक स्वास्थ्य और स्किन को बेहतर बनाती है।

•उठते ही पानी पीना: यह शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया को शुरू करता है.

• खाना 80% पेट भरकर (हारा हाची बु): आराम से भोजन करने की हिचक मोटापे और मेटाबोलिक बीमारियों को रोकती है।

• प्लांट बेस्ड आहार: ताजे फल, सब्जियां, मिसो, टोफू, समुद्री शैवाल, चावल और अनमिलेटेड अनाज।

• मछली खाना: ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय स्वास्थ्य और रक्त वाहिका संचार को संतुलित रखें। 

• माच्छा हरे चाय एवं चाय समारोह (चादो): एंटीऑक्सीडेंट, सामाजिक संबंध और आत्म संयम।.

• एक्टिव लाइफस्टाइल: पैदल चलना, साइकिलिंग, टहलना, बागवानी आदि कार्य दैनिक रूप से किए जाते हैं, जिससे दिल की बीमारियां कम होती हैं

• साफ-सफाई और दो बार स्नान: जापानी लोग व्यक्तिगत और वातावरणीय सफाई को अत्यधिक महत्व देते हैं

• “इकिगाई”: अपने जीवन का उद्देश्य ढूंढना और उसे जीना, जिससे मानसिक संतुलन और स्वाभाविक प्रसन्नता बनी रहती है

बुढ़ापे में दिखने वाले लक्षण

•सक्रियता बनी रहती है: जापानी बुजुर्गों में शारीरिक व मानसिक सक्रियता के लक्षण दिखते हैं.

•त्वचा जवान, झुर्रियां कम, स्किन ग्लोइंग: नियमित देखभाल, ग्रीन टी, सीवीड और हेल्दी डाइट से त्वचा में निखार रहता है।

•हड्डियां मजबूत और इम्यूनिटी तंदरूस्त: विटामिन डी, फाइटोएस्ट्रोजेन्स , और नियमित योगाभ्यास।

•मोटापा या lifestyle diseases कम: खासतौर पर कैंसर, हार्ट डिसीज, डायबिटीज जापानी जीवनशैली में अपेक्षाकृत कम देखी जाती हैं।.

•मानसिक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण: “इकिगाई” का अभ्यास वृद्धावस्था में भी उद्देश्य व मंच बनाए रखता है.

•सामाजिक जुड़ाव व सम्मान: “वरिष्ठ नागरिक दिवस” पर 100 साल पूरे करने पर सरकारी सम्मान, जिससे जीवन में सामाजिक मूल्य बना रहता है.

विस्तृत विवरण — जापानी दीर्घायु आदतें

खानपान

ताजे फल, सब्जियां, समुद्री भोजन और कम कैलोरी वाला भोजन पर केंद्रित रहता है। मीठा, फैट और प्रोसेस्ड फूड बहुत कम. भोजन में सीमित मात्रा, धीरे-धीरे और सम्मानपूर्वक खाने की परंपरा है.

दैनिक गतिविधियां

स्वच्छता, अपने घर और परिवेश को साफ रखना, योग एवं ध्यान, और रोज थोड़ा शारीरिक श्रम जैसे चलना, बागवानी.

मानसिकता और सामाजिक संबंध

“इकिगाई” जीवन का उद्देश्य विकसित करना, अपने पसंदीदा कार्य करना, परिवार व मित्रों से जुड़ाव और समय-समय पर पारंपरिक आयोजन.

प्राकृतिक जीवन शैली

कृत्रिमता से दूर, प्रकृति और मौसमी परिवर्तन के साथ रहना, उत्तम हवा, जल और वातावरण।

बुढ़ापा कैसे दिखता है जापान में?

• ऊर्जा और सक्रियता बनी रहती है।

• त्वचा, बाल और आंखों में चमक बरकरार।

• पुराने रोगों की संभावना कम, स्वस्थ joints और नियंत्रित रक्तचाप.

•मानसिक रूप से संतुलित, उदासी या अकेलेपन की संभावना कम.

•सामाजिक रूप से जुड़े हुए और सम्मानित जीवन.

यदि जापानी जीवनशैली की ये आदतें अपनाई जाएं—जैसे संयमित भोजन, एक्टिव लाइफस्टाइल, साफ-सफाई, सामाजिक संबंध, तनावमुक्त जीवन, “इकिगाई”—तो औसत उम्र में 11 साल तक की वृद्धि, लंबा और जवान दिखने वाला जीवन संभव है. इसी वजह से जापान दुनिया का सबसे दीर्घायु और स्वस्थ राष्ट्र माना जाता है।

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