Homeblogदीपावली: प्रकाश पर्व का सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक आयाम.

दीपावली: प्रकाश पर्व का सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक आयाम.

 दीपावली: प्रकाश पर्व का सांस्कृतिक, धार्मिक और
सामाजिक आयाम.

दीपावली हमें यह याद दिलाती है कि जीवन केवल बाह्य चमक का ही नहीं,
बल्कि
आंतरिक आलोक का भी उत्सव होना चाहिए। यदि हम दीपावली को केवल दिखावे में न गँवाकर
,
इसे
ज्ञान
, दान, सद्भावना और पर्यावरण संरक्षण जैसे मूल्यों से जोड़ें तो यह पर्व और
भी सार्थक बन सकता है। 

दीपावली को प्रकाश पर्व कहा जाता है. यह सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक उत्सव भी है. भारतीय समाज की परंपराएं और जीवन दर्शन यहाँ झलकता है. यह त्योहार भारत से बाहर विदेशों में भी मनाया जाता है. दुनिया भर के भारतीय समुदाय इसे धूमधाम से मनाते हैं.  

दीपावली शब्द दीप और आवली से मिलकर बना है. इसका मतलब होता है दीयों की कतार. यह अंधेरे पर रोशनी की जीत का प्रतीक है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसके पीछे अलग कहानियां हैं.  

उत्तर भारत में इसे भगवान राम के अयोध्या लौटने से जोड़ा जाता है. लोगों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था. महाभारत की कथा के अनुसार पांडवों के वापस आने पर भी दीये जलाए गए थे. समुद्र मंथन वाली कहानी में देवी लक्ष्मी के प्रकट होने का दिन भी यही माना जाता है.  


दक्षिण में नरकासुर पर कृष्ण की जीत को याद किया जाता है. जैन धर्म में यह महावीर के निर्वाण का दिन है. सिख इतिहास में गुरु हरगोबिंद सिंह ने इस दिन कैदियों को छुड़ाया था. इस तरह यह त्योहार सभी धर्मों से जुड़ा हुआ है.  


दीपावली पांच दिन तक चलता है. पहले दिन धनतेरस पर लोग सोना या बर्तन खरीदते हैं. दूसरे दिन छोटी दिवाली में सुबह स्नान और दीपदान होता है. तीसरे दिन मुख्य त्योहार पर लक्ष्मी पूजा की जाती है. घरों को रोशनी से सजाया जाता है. 

 
चौथे दिन गोवर्धन पूजा होती है. इसमें कृष्ण ने पर्वत उठाकर लोगों की रक्षा की थी. आखिरी दिन भाई दूज पर बहनें भाइयों को तिलक लगाती हैं.  


इस त्योहार का आध्यात्मिक महत्व भी है. दीया जलाना अंधेरे को मिटाने और आत्मशुद्धि का प्रतीक है. लक्ष्मी पूजा के साथ ही लोग व्रत भी रखते हैं.  


सांस्कृतिक तौर पर घरों की सफाई और रंगोली बनाने का चलन है. मिठाइयाँ बनती हैं और उपहार बाँटे जाते हैं. बाजारों में खरीदारी का दौर चलता है. सोने-चांदी की बिक्री बढ़ जाती है.  


आजकल पटाखों से प्रदूषण की समस्या होने लगी है. कई लोग अब मिट्टी के दिए और प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल करते हैं. गरीबों को दान देने की परंपरा भी बढ़ रही है.  


यह त्योहार पूरे भारत में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. विदेशों में भी भारतीय इसे धूमधाम से मनाते हैं. अमेरिका और ब्रिटेन में कई जगह इसे आधिकारिक तौर पर मान्यता मिल चुकी है.  

दिवाली हमें सिखाती है कि छोटा सा दिया भी अंधेरे को मिटा सकता है. सुख-समृद्धि तभी सार्थक होती है जब वह सही तरीके से हासिल की जाए. परिवार और समाज के साथ मिलकर खुशियाँ बाँटना ही असली उत्सव होता है.  

आज के समय में त्योहार का स्वरूप बदला है पर संदेश वहीं रहा है. अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता यह पर्व हमें आंतरिक आलोक की याद दिलाता है.

प्रदूषण की समस्या

अत्यधिक पटाखों से ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसलिए ग्रीन क्रैकर्स या बिना पटाखों के उत्सव मनाने की पहल हो रही है। 

अत्यधिक उपभोक्तावाद

 त्योहार के दौरान खर्च और दिखावा बढ़ गया है, जिससे मूल आध्यात्मिक महत्व कहीं खोने लगता है 

पर्यावरण-अनुकूल दीपावली

 अब कई लोग मिट्टी के दिए, प्राकृतिक रंगों की रंगोली और ऑर्गेनिक मिठाइयों से दीपावली मनाते हैं। 

सामाजिक अभियान

 विभिन्न संगठन इस अवसर पर गरीबों को दान करके और उनके साथ दीपावली मनाने का संदेश देते हैं।  

 साहित्य, कला और दीपावली

दीपावली भारतीय साहित्य और कला में भी गहराई से अंकित है। 
 
– कवियों ने इसे प्रकाश और अंधकार के अद्भुत संगम के रूप में चित्रित किया है। 
– चित्रकला में दीपावली की झाँकियाँ, लक्ष्मी-गणेश पूजन तथा दीपमालाओं का विशेष वर्णन मिलता है। 
– नाटक और नृत्य प्रस्तुतियों में भी दीपावली एक प्रमुख विषय रहा है। 

भारत और विदेशों में दीपावली

भारत में
उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु आदि सभी राज्यों में दीपावली अपने-अपने ढंग से मनाई जाती है। 
विदेशों में
 नेपाल में तिहार, श्रीलंका में लक्ष्मी पूजा, मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा, और ब्रिटेन में बसे प्रवासी भारतीय इसे बड़े स्तर पर मनाते हैं। 
अमेरिका और ब्रिटेन
कई जगहों पर दीपावली सरकारी कैलेंडर में शामिल की गई है और सार्वजनिक स्तर पर इसकी झलक दिखाई देती है। 

जीवन-दर्शन और संदेश 

दीपावली केवल त्योहार नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि: 
 
– अंधकार (अज्ञान) चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटा सा दीपक (ज्ञान) उसे दूर कर सकता है। 
– सुख-संपत्ति तभी सार्थक है जब वह धर्म और सत्य के मार्ग पर अर्जित की जाए। 
– समाज और परिवार में सामंजस्य एवं सहयोग ही सच्चा उत्सव है। 

 निष्कर्ष

दीपावली भारतीय जीवन का ऐसा पर्व है जो धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक सभी पहलुओं को जोड़ता है। समय बदलने के साथ इसके स्वरूप में परिवर्तन अवश्य आया है, परंतु इसका मूल संदेश वही है – [अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर और मृत्यु से अमरत्व की ओर बढ़ना। .]
 
दीपावली हमें यह याद दिलाती है कि जीवन केवल बाह्य चमक का ही नहीं, बल्कि आंतरिक आलोक का भी उत्सव होना चाहिए। यदि हम दीपावली को केवल दिखावे में न गँवाकर, इसे ज्ञान, दान, सद्भावना और पर्यावरण संरक्षण जैसे मूल्यों से जोड़ें तो यह पर्व और भी सार्थक बन सकता है। 
 

 

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