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झारखंडी पिठा (दाल पिठा / गुड़ पिठा): स्वाद, परंपरा और स्वास्थ्य का अनोखा संगम.

झारखंडी पिठा रेसिपी | दाल पिठा और गुड़ पिठा बनाने की विधि हिंदी में.

परिचय (Introduction)

झारखंड की लोकसंस्कृति में पिठा का अत्यधिक महत्व है। यह केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और ग्रामीण परंपराओं से जुड़ी एक भावनाकारी पहचान है। यहां दाल पिठा और गुड़ पिठा जैसे विशेष पिठे मकर संक्रांति, सोहराय, करमा और शादी-ब्याह जैसे खास अवसरों पर बनते हैं।

चावल के आटे से तैयार ये पिठे सादगी में भी भरपूर स्वाद और पोषण प्रदान करते हैं। झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण समुदायों में पिठा को एक ऊर्जावान, सुपाच्य और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद आहार माना जाता है।

पिठा क्या है? (What is Pitha?)

पिठा एक पारंपरिक व्यंजन है, जो चावल के आटे से जाड़े में बनाया जाता है और इसे भाप में पकाया या उबालकर तैयार किया जाता है। इस व्यंजन के भीतर मीठे या नमकीन भरावन डाली जाती है।

दाल पिठा :इसमें चना दाल या उड़द दाल का मसालेदार मिश्रण भरा जाता है।

गुड़ पिठा: इसमें गुड़, नारियल और तिल की मीठी भरावन होती है।

झारखंड के अलावा, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी पिठा के कई प्रकार मिलते हैं। हालांकि, झारखंडी पिठा अपनी सादगी और देसी स्वाद के कारण खास पहचान रखता है।

दाल पिठा बनाने की आवश्यक सामग्री

बाहरी परत के लिए:

  • चावल का आटा – 2 कप
  • गुनगुना पानी – आवश्यकतानुसार
  • नमक – स्वादानुसार

भरावन (स्टफिंग) के लिए:

  • चना दाल या उड़द दाल – 1 कप (भीगी हुई)
  • हरी मिर्च – 2 (बारीक कटी)
  • अदरक – 1 इंच (कद्दूकस किया हुआ)
  • लहसुन – 4–5 कलियां
  • जीरा – 1 छोटा चम्मच
  • सरसों का तेल – 1 बड़ा चम्मच
  • हल्दी – 1/2 छोटा चम्मच
  • नमक – स्वादानुसार
  • हरा धनिया – बारीक कटा हुआ
  • सोआ पत्ता -बारीक  कटा हुआ
  •  

दाल पिठा बनाने की विधि (Dal Pitha Recipe in Hindi)

झारखंडी पिठा रेसिपी: दाल पिठा और गुड़ पिठा बनाने की सरल विधि

चरण 1: आटा तैयार करना

चावल के आटे में धीरे-धीरे गुनगुना पानी मिलाएं, जिससे आटा नरम और लचीला हो जाए। इसे अच्छे से गूंथकर, एक कपड़े से ढककर 10 से 15 मिनट के लिए रख दें।

चरण 2: भरवां सामग्री बनाना

भीगी हुई दाल को दरदरा पीस लें। एक कढ़ाई में सरसों का तेल गरम करें, उसमें जीरा डालें और फिर अदरक, लहसुन, और हरी मिर्च डालकर अच्छे से भूनें। इसके बाद मिश्रण में पिसी दाल, हल्दी, और नमक डालकर 3 से 4 मिनट तक हल्का भूनें। अंत में, ताजा हरा धनिया डालकर अच्छे से मिला लें।

चरण 3: पिठा बनाना

आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें हथेली से चपटा करें। बीच में दाल की भरी सामग्री रखें और आटे के किनारों को मोड़कर आधे चंद्रमा का आकार दें।

चरण 4: पिठा पकाना

इन्हें भाप में पकाने के लिए एक कुकर या स्टीमर का उपयोग करें। पिठा को लगभग 10–15 मिनट तक भाप में पकने दें।

इस पारंपरिक झारखंडी पिठा का स्वाद न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि यह पोषण से भरपूर भी है, जो खासतौर पर सर्दियों के मौसम में सेवन के लिए उचित है। ये पिठा ऊर्जा को बढ़ाते हैं और प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं।

गुड़ पिठा बनाने की आवश्यक सामग्री

बाहरी परत के लिए:

  • चावल का आटा – 2 कप
  • गुनगुना पानी – आवश्यकतानुसार

मीठी भरावन के लिए:

  • गुड़ – 1 कप (कद्दूकस किया हुआ)
  • ताजा नारियल – 1/2 कप (कद्दूकस किया हुआ)
  • तिल – 2 बड़े चम्मच (भुने हुए)
  • इलायची पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच

गुड़ पिठा बनाने की विधि (Gur Pitha Recipe in Hindi)

चरण 1: भरावन तैयार करें

कढ़ाही में गुड़, नारियल और तिल को धीमी आंच पर हल्का पकाएं। जब मिश्रण एकसार हो जाए, तब इलायची डालकर ठंडा करें।

चरण 2: पिठा बनाएं

चावल के आटे की लोई लें, चपटा करें, बीच में गुड़ की भरावन रखें और बंद करें।

चरण 3: पकाने की प्रक्रिया

इन्हें भी भाप में 15–20 मिनट तक पकाएं। कुछ जगहों पर गुड़ पिठा को हल्का तलकर भी बनाया जाता है।

झारखंडी पिठा के स्वास्थ्य लाभ

1. ऊर्जा का अच्छा स्रोत – चावल और गुड़ तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं।

2. पाचन में सहायक – स्टीम्ड होने के कारण यह हल्का और आसानी से पचने योग्य होता है।

3. प्रोटीन से भरपूर – दाल का उपयोग इसे प्रोटीन का अच्छा स्रोत बनाता है।

4. आयरन का स्रोत – गुड़ आयरन से भरपूर होता है, जो खून की कमी को दूर करने में सहायता करता है।

5. हृदय के लिए लाभकारी – तिल और सरसों का तेल अच्छे फैट प्रदान करते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।

6. केमिकल-फ्री भोजन – यह पूरी तरह से देसी और प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया जाता है।

झारखंडी संस्कृति में पिठा का महत्व

झारखंड में पिठा सिर्फ एक भोजन नहीं है, बल्कि यह एक परंपरा का प्रतीक है। महिलाएं मिलकर पिठा बनाती हैं, जिससे न केवल परिवार में बल्कि सामुदायिकता में भी मजबूती आती है। यह प्रक्रिया सामाजिक संबंधों को बढ़ाने का एक माध्यम बनती है।

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