जैसलमेर: भारत का स्वर्ण नगरी,पर्यटन एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण .
परिचय:
जैसलमेर एक शहर है जो भारत के राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित है। यह शहर उसी राजा जैसल के नाम पर है जिन्होंने 12वीं शताब्दी में स्थापित किया था। जैसलमेर अपने सुनहरे रेतीले टीलों, अद्वितीय स्थापत्य कला, और ऐतिहासिक किलों के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर मध्य थार मरुस्थल के बीचोबीच बसा हुआ है और अपनी सुनहरी रेत और पत्थरों से बनी इमारतों के कारण एक अलग पहचान रखता है।
इतिहास:
जैसलमेर का इतिहास समृद्ध और गौरवशाली है। इसका निर्माण 1156 ईस्वी में भाटी राजपूत शासक महारावल जैसल ने करवाया था। यह शहर अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। यह प्राचीन काल में भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक मार्गों का मुख्य केंद्र था। यहाँ पर ऊँट व्यापार और रेशम मार्ग का भी बड़ा महत्व था।
जैसलमेर का किला:
जैसलमेर का किला, जिसे सोनार किला या स्वर्ण किला भी कहते हैं, शहर का यह एक मुख्य आकर्षण है। यह विश्व धरोहर स्थल में शामिल है, और इसे राजस्थानी स्थापत्य का पराक्रमी उत्कृष्ट उदाहरण मानते हैं। यह त्रिकूट पहाड़ी पर, पीले बलुआ पत्थरों से बनाया गया किला सूर्य की रोशनी में सोने जैसा चमकता है। इस किले के अंदर से जैन मंदिर, राजा का महल और अन्य काफ़ी सारे ऐतिहासिक स्मारक स्थित हैं। किले के अंदर वहां स्थानीय लोगों की बस्तियाँ भी स्थित हैं, जो उसे जीवंत बनाती हैं।
स्थानीय स्थापत्य कला:
जैसलमेर की स्थापत्य कला विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ के हवेले, जैसे पटवों की हवेली, नथमल की हवेली और सलम सिंह की हवेली, अपने बारीक नक्काशीदार झरोखों और जालीदार खिड़कियों के लिए प्रसिद्ध हैं। इन हवेलियों की अद्वितीय शिल्पकला और डिज़ाइन राजस्थान की सांस्कृतिक और कलात्मक धरोहर को दर्शाते हैं।
मरुस्थल का सौंदर्य:
थार मरुस्थल जैसलमेर की एक और प्रमुख विशेषता है। यहाँ के रेतीले टीले, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘धोरी’ कहते हैं, सूर्यास्त और सूर्योदय के समय अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं। सैम और खुरी गाँव जैसे स्थानों पर ऊँट सफारी का आनंद लिया जा सकता है। ये सफारियाँ पर्यटकों को मरुस्थल की गहराइयों तक ले जाती हैं, जहाँ वे रेगिस्तान की शांत सुंदरता और स्थानीय संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं।
सांस्कृतिक महत्व:
जैसलमेर न केवल अपनी प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी इसे विशेष बनाती है। यहाँ पर हर साल “मरु उत्सव” का आयोजन होता है, जिसमें लोक संगीत, नृत्य, ऊँट दौड़, और पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन किया जाता है। इस उत्सव में देश-विदेश से पर्यटक आते हैं और राजस्थान की संस्कृति का आनंद लेते हैं।
जैन मंदिर:
जैसलमेर के जैन मंदिर भी यहाँ के प्रमुख आकर्षणों में से एक हैं। ये मंदिर 12वीं और 15वीं शताब्दी के बीच बनाए गए थे और इन्हें पीले बलुआ पत्थरों से तराशा गया है। इनमें पाश्र्वनाथ और ऋषभदेव को समर्पित मंदिर प्रमुख हैं। इन मंदिरों की नक्काशी और स्थापत्य कला अत्यंत बारीक और मनमोहक है।
गदिसर झील:
जैसलमेर की गदिसर झील एक दूसरा प्रमुख पर्यटन स्थल है। इसे महारावल गदिसर सिंह ने 14 वीं शताब्दी में बनवाया था। यह झील एक समय में शहर के जल आपूर्ति का प्राथमिक स्रोत थी। यहां झील किनारे बने मंदिर, छतरियां और घाट जैसी सौंधी-सौंधी इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं। यहां पक्षियों की कई प्रजातियों को देखा जा सकता है जिससे ये जगह पक्षीप्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है।।
खाने-पीने की विशेषता:
जैसलमेर का भोजन राजस्थानी व्यंजनों का असली स्वाद प्रदान करता है। यहाँ की दाल बाटी चूरमा, गट्टे की सब्जी, केर सांगरी, और मिर्ची बड़ा बहुत प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा, स्थानीय मिठाइयाँ जैसे घेवर, फेनी और बाजरे की रोटी भी यहाँ के खानपान का अभिन्न हिस्सा हैं।
खरीदारी और हस्तशिल्प:
खरीदारी का अनुभव जैसलमेर में अनोखा होता है। ये बाजार रंगीन और जीवंत होते हैं, जहाँ राजस्थानी हस्तशिल्प, पारंपरिक गहने, लकड़ी और पत्थर की नक्काशी, कशीदाकारी वस्त्र, और ऊँट के चमड़े से बने सामान पाए जाते हैं। पर्यटक राजस्थानी कलाकृतियाँ और स्मृति चिह्न लेकर यहाँ से जाते हैं।
पर्यटन का महत्व:
जैसलमेर यहाँ पर्यटन के क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान रखता है। यह इस शहर भारत और विदेशों से आने वाले सभी पर्यटकों को अपनी ओर आकृष्ट करता है। जैसलमेर के पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को काफी लाभ पहुँचता है। यहाँ के होटलों, रिसॉर्ट्स, मरुस्थल कैंपों में पर्यटकों को पारंपरिक राजस्थानी आतिथ्य का अनुभव आता है।
जैसलमेर है वह शहर, जो अपने इतिहास, संस्कृति, और प्राकृतिक सौंदर्य से हर एक को मोहित कर लेता है। इसे एक बार देखने पर व्यक्ति यह हर एक की प्रभात किरण बनने लगता है और पारंपरिक जीवनशैली का कायल भी हो जाता है। जैसलमेर वास्तविक रूप से यह भारत का जैसा रत्न है, जो न केवल राजस्थानी धरोहर को संजोए रखता है, किन्तु इस दुनिया में प्रसिद्ध करने का कुछ काम करता भी है।

