Homeblogआमलकी एकादशी 2026: व्रत विधि, पूजा विधि और पौराणिक कथा

आमलकी एकादशी 2026: व्रत विधि, पूजा विधि और पौराणिक कथा

रंगभरी एकादशी जिसे आमलकी के नाम से भी जाना जाता है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रंगभरी एकादशी/ आमलकी एकादशी का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन शादी के बाद पहली बार भगवान शिव माता पार्वती को काशी लेकर आए थे। इसलिए इस दिन रंगभरी एकादशी कथा का पाठ करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

आमलकी एकादशी का महत्व

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व है।

आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को अति प्रिय है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। इस कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी का मन वैराग्य से भर उठा और वह भगवान विष्णु की कठोर तपस्या करने लगे।

उनकी कठोर तपस्या से भगवान विष्णु प्रसन्न हो गए और फाल्गुन की शुक्ल तृतीया को उनके दर्शन किए। भगवान विष्णु को अपने सम्मुख देख कर प्रेम और भक्ति के अतिरेक से ब्रह्मा जी के अश्रु प्रवाहित हो जाएं।

अश्रु पूर्णित उत्सवों से जब विष्णु जी के चरण में अपना मस्तक खींचा गया तो उनके अश्रु विष्णु जी के चरण को धोने लगे और विष्णु जी के चरण से बाहर जब वह अश्रु से नीचे उतरे तो वहां से आँवले की उत्पत्ति हुई।

भगवान विष्णु बोले, हे पुत्र! यह फलाफ़े एश्रेन्स से उत्पन्न हुआ है, इसलिए यह मुझे अति प्रिय है। जो भी इस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा करेगा, वह भी मुझे अति प्रिय होगा।

 

इस दिन ब्रह्मा जी के अश्रु से संयुक्त रूप से उत्पन्न होने के कारण इस ब्रह्मा जी का नाम आम्लकी ब्रह्मा रखा गया और इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाने लगी।

 

 

आमलकी एकादशी व्रत कथा

 

धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण को नमन करते हुए कहा, हे मुरलीधर! आपकी हमारी बड़ी कृपा है कि आप सभी एकादशियों की विधि-विधान हमें बताएं।

अब आप फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का वर्णन करें। इस एकादशी का क्या नाम है इसकी क्या कथा है?

 

चक्रधारी कृष्ण बोले, हे राजन! इस एकादशी का नाम आमलाकी एकादशी है। इस दिन जो मनुष्य आँवले के वृक्ष की पूजा करता है, वह मुझे अति प्रिय मानता है।

 

एक बार राजा मांधाता ने इस ब्रह्माण्ड की कथा से मारीशस की इच्छा प्रकट की थी। तब स्टैलिस्ट जी ने उन्हें जो कथा सुनाई थी, वही मैं तारा सूर्यता हूँ।

 

एक बार राजा मांधाता ने महर्षि महर्षि से कहा, हे ऋषिवर! कृपया करके कोई ऐसा पूजन और व्रत बताए जो श्री हरि को अति प्रिय हो और करने से मैं जन्म-मरण के चक्र से मुक्त सीधे सीधे विष्णु लोक को प्राप्त कर सकूं।

वैश्य जी बोले, हे राजन! आमलकी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को अति प्रिय है। यह एक समान सहस्त्र वस्त्र का दान करने का पुण्यफल देने वाला व्रत है।

 

मंधाता बोले, हे मुने! इस व्रत की कथा क्या है?

 

वैश्य जी बोले, हे राजन! इस मोक्ष उपदेश वाले व्रत की कथा मैं विश्राम सुनता हूं, ध्यान अंधकार सुनो।

 

प्राचीन काल में वैदिक नामक एक राज्य में राजा चित्रसेन राज करता था। उस राज्य के सभी प्रजा जन सदैव प्रभु की भक्ति में लगे रहे।

चित्रसेन भगवान विष्णु के परम भक्त थे। पिक्चरसेन और उनके संपूर्ण पेज हर पूर्णिमा का व्रत रखते थे।

 

एक आमलकी ब्रह्माण्ड के दिन चित्रसेन देव स्थल पर पर्यटक पूजा कर रहे थे। रात के समय वहां एक भूखा प्यासा बहेलिया भटकता हुआ आया।

भोजन की आशा में वह देव स्थल पर सभी के साथ बैठी। पूरी रात सभी पेजेजन ने जनरेट किया। वह बहेलिया समुद्र तट और वडोदरा की कथा और भगवान विष्णु की महिमा का गुणगान सुनता रहा।

प्रात: होने पर सभी व्यक्ति चले गए। बहेलिया भी चला गया। उसके कुछ समय बाद बहेलिये की जीवन लीला समाप्त हो गयी।

हालाँकि वह नर्क का अधिकारी था। लेकिन मृत्यु से कुछ दिन पहले आमलकी एकादशी के दिन भूखा प्यासा रहना और रात्रि विश्राम के कारण उनका एकादशी का व्रत पूरा हो गया था।

उस व्रत के पुण्य के रूप में उन्हें राजा विदूरथ के घर पुनर्जन्म प्राप्त हुआ। इस जन्म में उनका नाम वसुर्थ रखा गया। युवावस्था में वसुर्थ एक यशस्वी राजा बना।

एक बार वह वन भ्रमण के लिए निकला। वन में उसे दिशा दी गई और एक पेड़ के नीचे विश्राम कर थका दिया गया। थोड़ी देर में उसे नींद आ गई।

तभी वन में रहने वाले दस्युओं ने राजा वसुरथ को देखा। वसुरथ ने अपने कई साथियों को मौत की सज़ा और देश से निर्वासन की सज़ा दी थी।

इसलिए प्रतिशोध की भावना से ग्राहकों ने उस पर आक्रमण कर दिया। लेकिन वह उस को किसी भी तरह से नहीं मार पा रहे थे।

कोई अदृश्य शक्ति राजा को दस्युओं के आक्रमण से बचा रही थी। कुछ क्षणो बाद राजा के शरीर से एक दिव्य रूपा देवी प्रकट हुई।

उस देवी ने उन सभी दुष्ट डाकुओं को मौत के घाट पहुंचा दिया। तभी राजा निद्रा से जागा। वह मृत दस्युओं को देख कर हतप्रभ रह गया।

वह मन ही मन ईश्वर से प्लांट लगा कि उसका प्राण बचाए। तभी आकाशवाणी हुई, हे वसुर्थ! पूर्व जन्म में आमलकी एकादशी का व्रत पूर्ण किया गया था।

उसी व्रत का शुभारंभ भगवान विष्णु ने किया। वसुर्थ मन ही मन भगवान को प्रणाम करके उनका राज्य लौटा दिया गया।

 

 

वैश्य ऋषि बोले, हे राजन! आमलकी एकादशी का व्रत एवं उपवास करके निसंदेह आप भी भगवान विष्णु की व्रत प्रार्थना प्राप्त कर सकते हैं।

 

अरे! इस आमलकी एकादशी के व्रत को जो भी श्रद्धा-भाव से पूर्ण करता है, वह भक्त मेरी कृपा से वैकुण्ठ लोक प्राप्त करता है।

 

आमलकी एकादशी व्रत विधि

 

  • इस दिन ब्रह्ममहोत्सव में उठ कर स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त हो जाये।
  • हाथ में तिल, कुश, अक्षत और जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • आँवले के पेड़ के नीचे एक वेदिका एक कलश स्थापित करें। कलश के मुख पर पांच पत्ते।
  • कलश पर आश्रम रख देम। उनके ऊपर विष्णु के ही परशुराम अवतार की प्रतिमा स्थापित की गयी।
  • अवतार की पूजा करें, और रात्रि जागरण करें।
  • द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन देना और कलश को मूर्ति सहित किसी ब्राह्मण को दान कर देना।
  • उसका बाद स्वयं भोजन करें।

वर्ष   में 26 एकादासी मनाए जाती है, जिसे आप यहाँ देखे .

यहां सभी 26 एकादशियों के नाम दिए जा रहे हैं।

  1. चैत्र कृष्ण पापमोचिनी एकादशी
  2. चैत्र शुक्ल कामदा एकादशी
  3. वैशाख कृष्ण वरूथिनी एकादशी
  4. वैशाख शुक्ल मोहिनी एकादशी
  5. ज्येष्ठ कृष्ण अपरा एकादशी
  6. ज्येष्ठ शुक्ल निर्जला एकादशी
  7. आषाढ़ कृष्ण योगिनी एकादशी
  8. आषाढ़ शुक्ल देवशयनी चतुर्थी
  9. श्रावण कृष्ण कामिका एकादशी
  10. श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी
  11. भाद्रपद कृष्ण अजा एकादशी
  12. भाद्रपद शुक्ल परिवर्तिनी एकादशी
  13. आश्विन कृष्ण इंदिरा एकादशी
  14. आश्विन शुक्ल पापाकुशा एकादशी
  15. कार्तिक कृष्ण राम चतुर्थी
  16. कार्तिक शुक्ल देववाणी एकादशी
  17. मार्गशीर्ष कृष्ण उत्पन्ना
  18. मार्गशीर्ष शुक्ल मोक्षदा
  19. पौष कृष्ण सफला एकादशी
  20. पौष शुक्ल पुत्रदा एकादशी
  21. माघ महीने के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी
  22. माघ महीने के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी
  23. फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी
  24. फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी
  25. कृष्ण महीने के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी
  26. शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी

 

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